

मुझे आज शुरुआत आरती,जितेन्द्र और धीरज का धन्यवाद करते हुए करनी पड़ेगी क्योंकि उन लोगों के बिना शायद ये दिन इतना यादगार नहीं हो पाता जितना हो गया.केक बहुत प्यारा था फूलों की महक अभी तक बनी हुए है.आपके गिफ्ट्स का आजीवन आभार रहेगा.

BAFEL में आख़िरी दिन (२९ जुलाई ),सच कहूँ तो ऐसा लगा मैं व्यक्ति से वक्तित्व हो गया हूँ.शुरुआत वहीँ से करनी होगी जहाँ से मैंने
शुरुआत की थी.बात 17 अगस्त २०१० की है जब मैं नई दुनिया के साथ बतौर इंटर्न काम कर रहा था.मुझे BAFEL से फ़ोन आया कि अगर आप हमारे साथ बतौर ट्रेनर काम करना चाहते हैं तो हमारे पास खाली स्थान है.दौर कमोबेश बेरोजगारी भरा ही था.
.मैंने चंद पल सोच कर हामी भर दी.हालाँकि ट्यूशन पढ़ाने का अनुभव पहले से था पर ट्रेनर एकदम नयी और अलग किस्म की जॉब थी.चुनौतियों से भरी थी.मुझे अंग्रेजी का अच्छा ज्ञान भी नही था और सच कहूँ तो मुझे इतना आत्मविश्वास भी नही था कि मैं इस जॉब को निभा पाऊंगा पर मुझे खुद पर इतना भरोषा था की मैं घुटने टेकने वाला नही हूँ.क्योंकि खुद पर भरोसा ही मेरी सबसे बड़ी ताक़त है.


चुनौतियाँ और बड़ी तब हो जाती है जब आप निहायत ही आकर्षक और आधुनिक किस्म की महिला की जगह ले रहे हों और आपके प्रशिक्षु ज्यादातर नौज़वान युवा हों.मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ.खैर मैंने उन सब बाधाओं को पार करते हुए आगे बढ़ने की कोशिश की और काफी हद तक सफल भी हुआ.
बात को आगे बढ़ाएं तो जो बात मुझे गर्व के साथ कहनी चाहिए वो ये कि यही वो जगह थी जहाँ से मुझे ज़िंदगी की पहली "रेस्पेक्टेड़ सैलेरी" चेक के रूप में मिली और चेक की राशि भी काफी आकर्षक थी *५९९ (जैसे रेबन का चश्मा १५९९ या adidas की स्वेटर २५९९ की).काफी सुकून और फ़ख्र भरा रहा सैलेरी का सीधा खाते में आ जाना.
इस दौरान कई सारे उतार-चदाव आये जिनसे बहुत कुछ सीखने को मिला और अपने को जानने का भी मौका मिला.मैं वैसे भी इस जगह को अपने लिए अच्छा मानता हूँ क्योंकि जब मेरा पहली बार
आई आई एम सी में रेडियो जौकीइंग के लिए चयन हुआ था तो मैं BAFEL से ही जुड़ा हुआ था,टी वी टी एम आई में चयन हुआ तो मै यहीं था और फिर से मेरा चयन आई आई एम सी में हुआ तो भी मै यही पर था.
जहाँ तक यहाँ पर बात करने के दौरान अनुभव की है तो अनुभव काफी मजेदार रहा.
.मैंने लगभग हर चीज़ में अपना हाथ आजमाया मसलन स्पोकन, पर्सनालिटी डेवलपमेंट .वाइस एंड एक्सेंट ,IELTS . सब कुछ में सफल तो नहीं रहा क्योंकि मुझे इन सारे मसलों में जानकारी कम है फिर भी ये सब करते हुए मेने लोगो को बहुत निराश नहीं किया.ये मैं खुद नहीं मेरे मित्र प्रशिक्षु कहा करते थे.
यहाँ पर कुछ बातों को अफ़सोस के साथ बताना भी बहुत जरुरी होगा मसलन मुझे खुद से शिकायत है कि जितना मुझे मौका मिला और जितने मेरे पास मौके थे मैं अपनी खुद की अंगरेजी को कहीं बेहतर कर सकता था जो मै शायद नहीं कर पाया.शायद मैं एक कर्मचारी बनकर ज्यादा रह गया.दूसरी जो बड़ी शिकायत है वो मेरी अपने प्रबंधन से है.मुझे बहुत बार ऐसा लगता था की मैं एक गैरजिम्मेदार संस्था के साथ काम कर रहा हूँ क्योंकि हम कई बार अपने प्रशिक्षुओं के साथ न्याय नहीं कर पाते थे हमारा ध्यान महीने के अंत की बैलेंस शीट पर ज्यादा रहता था.खैर व्यवसाय की अपनी मजबूरियां हो सकती हैं पर संस्था को ज्यादा ज़िम्मेदार होने की जरुरत मुझे आज भी महसूस होती है.वरना हो सकता है हम अपने ब्रांड के साथ उचित न्याय न कर पायें.

खैर मौका उपदेश देने का नहीं है बेहतर होगा जिस भावना के साथ ये ब्लॉग लिखने बैठा था उसी को आगे बढाया जाये.और आप सभी का धन्यवाद किया जाये जिन्होंने इस चोटी ही सही पर बेहतरीन यात्रा में मुझे अपना समझा,सराहा,ढेर सारा प्यार दिया और इस छोटी सी यात्रा को यादगार बनाया.शायद सबसे पहला नाम सलोनी मैम को कहना होगा क्योंकि उन्होंने मुझे पोडियम पर खड़ा होने का हरसंभव प्रोत्साहन दिया.अपने सहकर्मियों अनिउल हक .रश्मि ,अमित,सिद्दार्थ,सूर्या सहित लव कुश और प्यारे के साथ को भुलाना भी भूल होगी.इस सूची में अगर अपने दोस्त कहें प्रशिक्षु कहें या अमानत कहें, का नाम जोड़ना शुरू करूँ तो शायद वक़्त और सूची दोनों कम पड़ जायेंगी.बेहतर होगा कि आपको एकमुश्त प्यार भरा धन्यवाद दिया जाए.
आपमें से बहुत लोग फोन ,फेसबुक आदि से जुड़े हुए हैं उम्मीद है किस न किसी बहाने आप लोग जुड़े रहेंगे.
जनसंचार के क्षेत्र मे जाने का इरादा है उम्मीद है इस छोटे से जनसंचार का फायदा मिलेगा.BAFEL परिवार से जुड़े सभी लोगों को भविष्य की शुभकामनाएं.
Heart touching Bhatt ji and one thing i liked the most that you raised an issue of Corporate Responsibility which is the need of the hour.
ReplyDeleteAapki aage ki yatra ke liye shubhkamnayein...:)
thank you naval bhai..koi to hai dhyan dene vaala....
ReplyDeletenaval bhai mere blog main pahala comment aapka hi hai.........
ReplyDeleteheart touching story
ReplyDeleteNice one Sir and I also cherish my time spent with you people at BAFEL a lot. Wish you very BEST of LUCK for the future and for your journey at IIMC and again I wish one day you start your own news channel....:):)
ReplyDeletethank you chaityana.lets hope for the best..i dont knoe about owning my own news channel if it happens i'll definitely ask for ur sharings.
ReplyDeleteNice lines,it was really nice to work with you as well as BAFEL.
ReplyDeleteAll the best.....NEERAJ.
Wish you very BEST of LUCK
ReplyDeleteRAJEEV SAAB MST LG RHA H APUN KO TO SBSE LONG
ReplyDeletesabka shukriya.par amit sir aapha ki aap bahut long comment likh rhe hain apr ye to chota hi tha.ne kaha t
ReplyDeletekam shabdo me acha kahna hi adat ban gayi hai
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