अंट-शंट

दिल में अरमान बहुत हैं लिख डालने के.पता नहीं उँगलियों को क्यों भरोसा नहीं होता कि मैं कुछ लिखूंगा तो की-बोर्ड की स्याही ख़त्म नहीं होगी.

Thursday, July 7, 2011

इन धुंधली तस्वीरों में तुम कितनी अच्छी लगती हो?

इन धुंधली तस्वीरों में तुम कितनी अच्छी लगती हो?


पलक झुकाए आँखें खोले जब सर पल्लू से ढकती हो.
इन धुधली तस्वीरों में तुम कितनी अच्छी लगती हो?

भीगी पलकें भारी मन से फिर कब आओगे कहती हो.
इन धुधली तस्वीरों में तुम कितनी अच्छी लगती हो?

फ़ोन करूँ तो धीरे से तुम "आई लव यू" सा कहती हो.
इन धुधली तस्वीरों में तुम कितनी अच्छी लगती हो?

रोज़ नहाके फूल सजाके नाम हरी का जपती हो.
इन धुधली तस्वीरों में तुम कितनी अच्छी लगती हो?

मैं पूछूँ जो 'क्या माँगा?' तो तुमको माँगा कहती हो.
इन धुधली तस्वीरों में तुम कितनी अच्छी लगती हो?

बात बदलकर रोते रोते, अब जवां हो गयी कहती हो.
इन धुधली तस्वीरों में तुम कितनी अच्छी लगती हो?

क्यों रोती हो जो पूछूँ तो "नहीं समझोगे" कहती हो.
इन धुधली तस्वीरों में तुम कितनी अच्छी लगती हो?

आंसू पोछ आप संभल के, "बात चली है" कहती हो.
इन धुधली तस्वीरों में तुम कितनी अच्छी लगती हो?

कल दो तस्वीरें लेकर पापा बोले किसपर हामी भरती हो?
इन धुधली तस्वीरों में तुम कितनी अच्छी लगती हो?

मैं पूछूँ 'अब क्या होगा?' तो भाग चलें क्या कहती हो.
इन धुधली तस्वीरों में तुम कितनी अच्छी लगती हो?


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